कौन नहीं चाहता

कौन नहीं चाहता,
वापस मिल जाये वो,
एक रुपये वाली अमीरी।

उस एक रुपये में,
मिल जाती थी,
खुशियाँ ढ़ेर सारी।

कभी वो आती,
रूठ जाने पर,
तो कभी आ जाती,
कुछ अच्छा कर जाने पर।

गमों से थी दूरियाँ,
खुशियों भरी थी दुनियाँ।

बारिश के पानी में,
कागज की नाँव सी,
गर्मी की धूप में,
माँ के आँचल की छाँव सी।

कौन नहीं चाहता,
वापस मिल जाये वो,
एक रुपये वाली अमीरी।

- पूजा डोरवाल

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