संदेश

जून, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वक़्त इंतजार का

चित्र
ये वक़्त इंतजार का है, कहीं खत्म तो कहीं शुरू होते इंतजार का। कोई अरसे बाद घर पर रुका होगा, तो कोई वापस घर लौट आना चाहता होगा। कोई खुश है बच्चों के साथ वक़्त बिता कर,  तो कोई इंतजार कर रहा उस टपरी वाली शाम का। कोई बरसों बाद माँ की गोद में सो रहा होगा, तो कोई एक झलक कब मिलेगी सोच कर रो रहा होगा। किसी ने सुकून से परिवार के साथ खाना खाया होगा,  तो किसी को भूखे बच्चों का ख़्याल सताया होगा। कोई घर से काम कर रहा होगा,  तो कोई वापस काम पर लौटने की राह देख रहा होगा। किसी को अपनों के संग इतने दिन गुजारकर आंनद आया होगा,  तो किसी को अपनों से दुरियों के ख़्याल ने सताया होगा। ये वक़्त इंतजार का है, कहीं खत्म तो कहीं शुरू होते इंतजार का। - पूजा डौरवाल

टपकते मोती

चित्र
क़ुदरत का जादू तो है ही सबसे प्यारा, रोज़ हमारे कुछ ना कुछ दिल में बस जाने वाला जादुई नजारा देखने को मिल ही जाते है। और कभी-कभी तो इन नजारों में ऐसे खो जाते है वक़्त का पता ही नहीं चलता। अपार्टमेंट की पहली मंजिल की खिड़की से दूर-दूर के नजारे को चारदीवारी पर लगे ये पेड़ अपने पीछे छुपा लेते है, मानो जैसे ये कहने की कोशिश कर रहे हो कि आपको बस हम अपने जादू दिखाएंगे क्योंकि आप हमें बेहद पसंद हैं।  आप भी सोच रहे होंगे ये पेड़ क्या जादु दिखाएंगे पर ये पेड़ अकेले नहीं है इनके साथ देती है वो लाइटें एक शाम की बात है मैं अपने कमरे में बैठी थी अचानक बारिश के आवाज़ कानों में पड़ी। जब पर्दे हटा कर बाहर देखा तो जोरों से बारिश हो रही थी, अनायास ही मेरी नजरें कोने वाली लाईट पर पड़ी, लाइट की रौशनी में बारिश की बूंदें साफ दिख रही थी, पर अभी तो लाईट और बारिश की बूंदों का अपना मिलाजुला जादू दिखाना बाकी था। उस लाइट में दिखाई देती बूंदों में "एक चमकती बूँद टपकी" उसे देख कर ऐसा लगा जैसे उस लाइट से कोई मोती गिरा हो और वो पेड़ों के पत्ते लाइट के आसपास ऐसे मंडरा रहे थे जैसे वो हर उस मोती को अपनी झोली ...