नयी पहचान
जिसका इंतजार था वो आज मेरी गोद में हैं। वो नन्ही जान नयी पहचान मेरी गोद में हैं। ये नन्हा मेहमान आया तब से ही रोने में खोया है, फिर मेरी गोद में आकर सूकून से सोया है। रोता उसे देख मेरे भी आँसू टपकने लगे, मुझे ऐसे देख वो भी रोते-रोते हँसने लगे। उसमें बसी हमारी जान है, अब तो उसके नाम से हमारी नयी पहचान है। वैसे अभी तो चल रही जाँच पड़ताल है, किसके जैसी आँखे या किसके जैसी मुस्कान है। जब उन नन्हें से लबों पर आती हँसी, आँगन में बिखर जाती खुशी। उसके आने से इस घर की भी मिली नयी पहचान है, लगता है जैसे घर की जान में आयी जान है। अब हर रिश्ते को फिर से सँवारा जायेगा, सबको उसके नाम से जोड़कर पुकारा जायेगा। - पूजा डोरवाल