छिपी खूबसूरती
यूँ तो कई मर्तबा आती रहती है वो हमारे घर, क्योंकि मेरी माँ की पसंदीदा जो हैं। पर आज पहली बार उससे कुछ यूं मुलाकात हुई कि उसकी खूबसूरती मेरे दिल को छू गई। और सोचने लगी कि हाय कुदरत की जादूगरी भी कितनी कमाल है जिस बंद गोभी को हमेशा बाहरी दो पत्ते का दीदार किया था उस पत्तों के अंदर इतनी खूबसूरती छिपी है उसका अंदाजा ही नहीं था,आज जब मैने उस पत्ता गोभी पर पहली मर्तबा चाक़ू चलाया और फिर जब उसके टुकड़ो को देख तो दंग रह गई, वो पत्ते कुछ उलझे कुछ सुलझे से परत दर परत मिलकर मनमोहक छवि बना रहे थे। - पूजा डौरवाल